कादम्बिनी क्लब, हैदराबाद

दक्षिण भारत के हिन्दीतर क्षेत्र में विगत २ दशक से हिन्दी साहित्य के संरक्षण व संवर्धन में जुटी संस्था. विगत २२ वर्षों से निरन्तर मासिक गोष्ठियों का आयोजन. ३०० से अधिक मासिक गोष्ठियाँ संपन्न एवं क्रम निरन्तर जारी...
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Friday, 15 July 2016

भूगोल - चंद्रधर शर्मा गुलेरी


एक शिक्षक को अपने इंस्पेक्टर के दौरे का भय हुआ और वह क्लास को भूगोल रटाने लगा। कहने लगा कि पृथ्वी गोल है। यदि इंस्पेक्टर पूछे कि पृथ्वी का आकार कैसा है और तुम्हें याद न हो तो मैं सुंघनी की डिबिया दिखाऊंगा, उसे देखकर उत्तर देना। गुरुजी की डिबिया गोल थी।


इंस्पेक्टर ने आकर वहीं प्रश्न एक विद्यार्थी से किया और उसने बड़ी उत्कंठा से गुरुजी की ओर देखा। गुरु ने जेब में से चौकोर डिबिया निकाली। भूल से दूसरी डिबिया आई थी। लड़का बोला, 'बुधवार को पृथ्वी चौकौर होती है और बाकी सब दिन गोल।' 

गालियां - चंद्रधर शर्मा गुलेरी


एक गांव में बारात जीमने बैठी। उस समय स्त्रियां समधियों को गालियां गाती हैं, पर गालियां न गाई जाती देख नागरिक सुधारक बाराती को बड़ा हर्ष हुआ। वह गांव के एक वृद्ध से कह बैठा, 'बड़ी खुशी की बात है कि आपके यहां इतनी तरक्की हो गई है।' 



बुड्ढ़ा बोला- 'हां साहब, तरक्की हो रही है। पहले गलियों में कहा जाता था.. फलाने की फलानी के साथ और अमुक की अमुक के साथ..। लोग-लुगाई सुनते थे, हंस देते थे। अब घर-घर में वे ही बातें सच्ची हो रही हैं। अब गालियां गाई जाती हैं तो चोरों की दाढ़ी में तिनके निकलते हैं। तभी तो आंदोलन होते हैं कि गालियां बंद करो, क्योंकि वे चुभती हैं।' 

पाठशाला - चंद्रधर शर्मा गुलेरी


एक पाठशाला का वार्षिकोत्सव था। मैं भी वहाँ बुलाया गया था। वहाँ के प्रधान अध्यापक का एकमात्र पुत्र, जिसकी अवस्था आठ वर्ष की थी, बड़े लाड़ से नुमाइश में मिस्टर हादी के कोल्हू की तरह दिखाया जा रहा था। उसका मुँह पीला था, आँखें सफेद थीं, दृष्टि भूमि से उठती नहीं थी। प्रश्न पूछे जा रहे थे। उनका वह उत्तर दे रहा था। धर्म के दस लक्षण सुना गया, नौ रसों के उदाहरण दे गया। पानी के चार डिग्री के नीचे शीतलता में फैल जाने के कारण और उससे मछलियों की प्राण-रक्षा को समझा गया, चंद्रग्रहण का वैज्ञानिक समाधान दे गया, अभाव को पदार्थ मानने, न मानने का शास्त्रार्थ कर गया और इंग्लैंड के राजा आठवें हेनरी की स्त्रियों के नाम और पेशवाओं का कुर्सीनामा सुना गया।

यह पूछा गया कि तू क्या करेगा? बालक ने सिखा-सिखाया उत्तर दिया कि मैं यावज्जन्म लोकसेवा करूँगा। सभा 'वाह वाह' करती सुन रही थी, पिता का हृदय उल्लास से भर रहा था।

एक वृद्ध महाशय ने उसके सिर पर हाथ फेरकर आशीर्वाद दिया और कहा कि जो तू इनाम माँगे, वही दें। बालक कुछ सोचने लगा। पिता और अध्यापक इस चिंता में लगे कि देखें, यह पढ़ाई का पुतला कौन-सी पुस्तक माँगता है।

बालक के मुख पर विलक्षण रंगों का परिवर्तन हो रहा था, हृदय में कृत्रिम और स्वाभाविक भावों की लड़ाई की झलक आँखों में दीख रही थी। कुछ खाँसकर, गला साफ कर नकली परदे के हट जाने से स्वयं विस्मित होकर बालक ने धीरे से कहा, 'लड्डू।'

पिता और अध्यापक निराश हो गए। इतने समय तक मेरी साँस घुट रही थी। अब मैंने सुख की साँस भरी। उन सब ने बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटने में कुछ उठा नहीं रखा था, पर बालक बच गया। उसके बचने की आशा है, क्योंकि वह 'लड्डू' की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था, मरे काठ की आलमारी की सिर दुखाने वाली खड़खड़ाहट नहीं।

Wednesday, 6 July 2016

कथनी-करनी - पवित्रा अग्रवाल

 अपनी नन्द को आया देख पम्मी ने कहा - "अरे रेणु आओ आओ तुम्हारा साउथ का ट्रिप कैसा रहा,कब लौटीं ?'

 "ट्रिप बहुत अच्छा रहा भाभी,रात को ही लौटी हूँ  पर क्या बात है ,आप बड़ी बुझी बुझी सी लग रही हैं,मम्मी से फिर कुछ कहा सुनी हो गई क्या ?'

 "रेणु,तुम तो मेरी सहेली की तरह हो,तुम से तो मैं हर बात कर लेती हूँ,आज सुबह सुबह मम्मी जी से मेरी तू तू मैं मैं हो गई।'

 "क्यों ?'

 "जब से उन्हें पता चला हैं कि मैं फिर से गर्भवती हूँ तब से मेरे पीछे पड़ी हैं कि मैं सैक्स डिटर्मीनेशन टैस्ट करा लूँ और अभी किसी को भी अपने गर्भवती होने की बात नहीं बताऊँ ।'

 "भाभी फिर तो वह यह भी चाहती होंगी कि यदि गर्भ में लड़की है तो उसे समाप्त कर दो ।'

 "हाँ ।'

 "कभी-कभी मम्मी को ये क्या हो जाता है,जो इस तरह की बातें करने लगती हैं।...आप परेशान न हों भाभी मम्मी को मैं समझाऊँगी,मम्मी अभी घर पर नहीं हैं क्या ?'

 "नहीं'

 "कहाँ गई हैं ?'

 "आल इंडिया रेडियों पर "सेव द गर्ल चाइल्ड' विषय पर वार्ता रिकार्ड कराने गई हैं।

- पवित्रा अग्रवाल !!